Tuesday, December 11, 2012

मुबारक हो .....

मुबारक हो ये पल और ये साथ आपको,
खुशियों से भरा ये संसार आपको ।
ख्वाहिशों की महफ़िल सजा कर रखना ,
छोटी - छोटी बातों का गम न करना ।
जी लो ज़िन्दगी की हर खुशी साथ मिलके,
कि खुदा भी झुक जाए तुम्हारे सामने हंस के।
ये पल ये खुशियाँ समेट लो दामन में अपने ,
की फिर कभी अँधेरा न हो आँगन में ।
ऐसे ही तो ज़न्नतें बनती हैं ज़मी पर,
क्योंकि आप साथ रहते हो यहीं पर ।।

Sunday, December 09, 2012

दोस्ती का हर फ़र्ज़......


दोस्ती का हर फ़र्ज़ अदा किया हमने,
आपकी बेरुखी को भी अपना कहा हमने ।
यूँ तो ज़माने ने बहुत कुछ सिखाया हमको ,
पर आपने अपनी वफ़ा के लिए बहुत तरसाया हमको ।
हमारी क्या मजाल थी की हम तुमसे दूर जाने की सोंचते ,
पर तुमने तो अपने ही गले से लगा के रुलाया हमको ।।

Friday, December 07, 2012

आस्तित्व बूँद का ......

समन्दर  से अलग होकर  बूँद,
समन्दर से बेवफाई करती है ,
लेकिन अपने आस्तित्व को एक नया जन्म देती है !
बूँद फिर से समन्दर में समाकर,
समन्दर से अपनी  वफ़ा निभाती है,
और अपने आस्तित्व को एक बार फिर से मिटाती  है !!

Monday, September 05, 2011

इस शिक्षक दिवस पर...

कभी उन्हें हम पर गुस्सा आता था
कभी हमें उन पर गुस्सा आता था,
जब एक्स्ट्रा क्लासेस में वो हमें बार -बार बुलाते थे ,
और हम क्लासरूम से बंक करके भाग जाते थे ।
फिर अगले दिन वो हम पर चिल्लाते थे ,
और हम बेशरम सर झुकाकर माफ़ी भी मांगते थे।
कभी उनका कहना सुनते थे तो कभी ,
अपनी मनमानी करते थे ।
कभी क्लास के टाइम पर कंटीन में पाए जाते थे ,
तो कभी सिरदर्द का बहाना कर हॉस्टल में सोते पाए जाते थे।
इतनी गलतियों के बावजूद उन्होंने हमें सिखाया ,
और आज हमें इस लायक बनाया ।
हम आज शुक्रिया कहतें हैं उन सभी शिक्षकों को ,
जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाया।

Saturday, August 06, 2011

बोलो है कोई ऐसा रिश्ता.........

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है एक ऐसा नाता है ,
जिसने एक दिल को दुसरे दिल से बंधा है|
दोस्ती का ये रिश्ता हर रिश्ते से ऊपर है,
ये तो एक ऐसा पवित्र बंधन है,
जो हर रिश्ते को पीछे छोड़ आया है,
आज भी हमें याद है वो बचपन के दिन,
जब हम साथ खेलते थे और लड़ते भी थे,
लेकिन आज भी हम उसी पवित्रता से एक दूजे के साथ हैं,
लाख झगड़े किये हमने लाख मनमुटाव हुए,
पर ये क्या कम है कि आज भी हम साथ हैं|
और हमारे दिल आज भी एक दूजे के लिए साफ़ हैं
बोलो है कोई ऐसा रिश्ता जो दोस्ती से पाक है ||

Saturday, January 22, 2011

कहानी उन परिंदों की...

हमें न जाने कहाँ से परिंदों से प्यार हो गया
सुबह बाज़ार जाकर हम कुछ परिंदे ले आये
कैद कर के रखा था हमने उन्हें कि
कहीं हमें छोड़ कर शायद वो उड़ न जाएँ
हर सुबह मैं उन्हें दाना खिलाती
उनके साथ मैं घंटों बिताती
वो फड़्फड़ाते थे उस बंद पिंजड़े में
शायद उड़ना चाहते थे खुले असमान में
पर मैं कभी उनका दर्द न समझ पायी
एक रोज़ अहसास हुआ कि क्यों कैद कर रखा है
हमने इन्हें इस पिंजरे में
आखिर क्या गुनाह है इनका...
शाम का वक्त था जब बैठी थी मैं उनके साथ
फिर मन में ख्याल आया और मैंने निश्चय किया
सुबह उठकर उन्हें आज़ाद कर दूंगी
उड़ा दूंगी इस खुले आसमान में
सुबह उठकर कर दिया उन्हें आज़ाद हमने
दर्द तो बहुत हुआ ....
क्योंकि बहुत प्यारे थे हमें वो
उन्हें आजाद करने के बाद बहुत रोयी मैं
शाम ढलते ही मुझे उनका ख्याल सताने लगा
इसी ख्याल के साथ जा पहुंची मैं छत पर
वहां जाकर देखा तो दंग रह गई
वहां का नज़ारा देखकर
सारे परिंदे वापस आ चुके थे
पर ये देखकर मैं कुछ समझ न पाई
कि उन्हें मुझसे लगाव हुआ था या फिर उस बसेरे से॥

Sunday, December 26, 2010

हम ऐसे क्यों हार जातें हैं......

हम ज़िन्दगी से ऐसे क्यों हार जाते हैं,
एक ही पल में सारा जहाँ झोड़ जातें हैं|
क्या चाहत है हमारी ज़िन्दगी से ,
हम उस पल वो भी भूल जातें हैं|
लोग कहतें हैं ये तो खेल है कुदरत का ,
ये तो किस्मत में लिखा है उस खुदा ने|
अगर कहीं खुदा है इस जहाँ में,
तो वो इतना बड़ा दर्द हमें कैसे दे पाता है||

Tuesday, December 21, 2010

किनारे कि तलाश में...

हम कश्ती में बैठे थे किनारे कि तलाश में ,
पर लहरों में कोई तो खलल थी ,
कोई तो तूफां था समंदर में|
हम समझना चाहते थे कि समन्दर,
इतना बेचैन क्योँ है आज |
हम कुछ भी समझ पाते ,
किनारा तलाश कर पाते |
उससे पहले ही हम अपनी कश्ती डूबा बैठे||

Wednesday, December 08, 2010

कब कहा था.................

हमें खुद पे गुरुर है ये हमने कब कहा था,
हम हर मुस्किल का सामना डट कर करेंगें ,
ऐसा हमने कब कहा था,
पर हम कमज़ोर भी तो न थे|

Friday, December 03, 2010

कोशिश

हर मुस्किल का सामना करना इतना आसान नहीं है,
एक कोशिश करके तो देखो.
अपना हौंसला बढ़ा के तो देखो,
रास्तें खुद-ब-खुद बन जायेंगें.