Thursday, November 17, 2016

इंसान हैं...

अगर करीने से संभाल के 
रख सकते हम खुद की किस्मत को 
खुदा  की कसम 
किसी को भी हक़ न देते 
खुद तक पहुँचने का 

इंसान हैं... 
इंसानी हवाला देके 
लोग हमें सुनाते हैं 
वरना तो इस नामुराद दुनिया 
की कहानी ही अलग होती !!


Friday, October 21, 2016

चलो कुछ दिए जलाएं....


इस दिवाली चलो कुछ दिए जलाएं
कुछ उदास चेहरों की
मुस्कुराहट लेके आएं

जो हमारे लिए जीतें है
जो हर वक़्त हमारी जररूरत
पूरी करतें हैं

जो हमारी ज़िन्दगी का
एक अटूट हिस्सा
बन चुके हैं

चलो आज हम उनके
चेहरे पे थोड़ी सी
हंसी लेके आएं

कुछ हंसी की पटाखे फोड़ें
उनकी आँखों की झिलमिल सी 
मुस्कराहट लेके आएं

इस दिवाली चलो कुछ दिए जलाएं
कुछ उदास चेहरों की
मुस्कुराहट लेके आएं !!!

Tuesday, October 04, 2016

सूरज ने कभी...




सूरज ने कभी जद्दोज़हद नहीं की चाँद से 
बस हौले से बोल दिया,
जब कभी बदली छाये मुझपे 
तो तुम चुपके से आ जाना !!

Friday, September 23, 2016

माना कि ज़िन्दगी आसाँ...

माना कि ज़िन्दगी आसाँ  नहीं होती,
जब जीने की कोई वजह नहीं होती!
अधूरे लम्हों की अधूरी कहानी सी लगती है,
अपनी ही दास्ताँ बेगानी सी लगती है !
माफ़ कर सको तो कर देना उस शक्स को,
वरना ज़िन्दगी हमारी नहीं लगती है !!

Sunday, September 18, 2016

किसी हवा के झोके के साथ...

किसी हवा के झोके के साथ 
तुम्हे मेरी याद छू जायेगी 
चाहो न चाहो 
इस दिल की आवाज़ 
उस दिल पहुँच 
ही जायेगी !!!



Friday, September 09, 2016

तो मैंने भी सोंचा ...

एक कोशिश लोगों ने की थी 
हमें तोड़ने की 
तो मैंने भी सोंचा 
एक कोशिश हम भी कर लें 
लोगों को जोड़ के देख लें !!

Friday, August 19, 2016

कुछ खट्टे मीठे पलों की दे रही हूँ ये यादें ...



कुछ खट्टे मीठे पलों की 
दे रही हूँ ये यादें ,
उम्मीद है संभाल  के रखोगे !
ज़िन्दगी की इस दौड़ में 
इस दोस्त को तो याद रखोगे !
कहने के लिए तो बहुत कुछ है 
मगर अभी के लिए 
बस इतना ही कहना है... 

"खुद पे रखना भारोसा 
न ही कभी उम्मीद खोना 
हालातों से हारना आशां है मगर 
नामुंमकिन तो नहीं... 
सब मिल जाएगा वक़्त पे 
बस हौंसले के साथ 
आगे बढ़ते रहना !!"




Thursday, August 11, 2016

चाँद से भेजी है ...

चाँद से भेजी है 
थोड़ी सी चाँदनी 
तुम्हारे लिए 
अगर वक़्त मिले 
तो खिड़की का 
पर्दा उठा के 
देख लेना !!! 






Friday, July 29, 2016

तेरा अल्लहड़पन याद आएगा...






तेरा अल्लहड़पन याद आएगा,
तेरी ये अनसुलझी बातें याद आएंगी !
तेरे संग बिताये इन लम्हों में,
तेरी महकी सी याद आएगी !
कह नहीं सकती कि तू दिल के करीब है कितना,
तेरे संग गुजरा हर लम्हा याद आएगा !
तेरी ये बातें ये मुलाकातें
सबकुछ संभाल के,
रखूँगी इस दिल में ! 
जा रही है तू यहाँ से .. 
मत समझ जा रही है तू दिल से,
बस पंख खोल के उड़ना 
इस खुले आसमाँ  में !
ज़मी तेरी है और ये आसमाँ  भी तेरा है...  
बस बुन लेना सपनो की चादर को ,
और उड़ जाना इस खुलेआसमाँ में !!

Thursday, July 14, 2016

क्यों खामोश हैं ये रातें ...


क्यों कुछ नहीं बोलती ये रातें 
क्यों नहीं करती हैं ये बातें 
शाम की सुहानी छांव के बाद 
माना हंसी हैं ये रातें 
चाँद की रौशनी में डूबी 
शबनमी ये रातें 
पर कभी कभी ये ख़ामोशी भी 
बड़ी बेगानी सी लगती है 
अनजाना है कोई वो 
जिसके बारे में गुफ्तगू करनी है 
इन रातों से... 
पर न जाने 
क्यों कुछ नहीं बोलती ये 
आखिर क्यों खामोश हैं ये रातें !!!