Saturday, August 06, 2011

बोलो है कोई ऐसा रिश्ता.........

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है एक ऐसा नाता है ,
जिसने एक दिल को दुसरे दिल से बंधा है|
दोस्ती का ये रिश्ता हर रिश्ते से ऊपर है,
ये तो एक ऐसा पवित्र बंधन है,
जो हर रिश्ते को पीछे छोड़ आया है,
आज भी हमें याद है वो बचपन के दिन,
जब हम साथ खेलते थे और लड़ते भी थे,
लेकिन आज भी हम उसी पवित्रता से एक दूजे के साथ हैं,
लाख झगड़े किये हमने लाख मनमुटाव हुए,
पर ये क्या कम है कि आज भी हम साथ हैं|
और हमारे दिल आज भी एक दूजे के लिए साफ़ हैं
बोलो है कोई ऐसा रिश्ता जो दोस्ती से पाक है ||

Saturday, January 22, 2011

कहानी उन परिंदों की...

हमें न जाने कहाँ से परिंदों से प्यार हो गया
सुबह बाज़ार जाकर हम कुछ परिंदे ले आये
कैद कर के रखा था हमने उन्हें कि
कहीं हमें छोड़ कर शायद वो उड़ न जाएँ
हर सुबह मैं उन्हें दाना खिलाती
उनके साथ मैं घंटों बिताती
वो फड़्फड़ाते थे उस बंद पिंजड़े में
शायद उड़ना चाहते थे खुले असमान में
पर मैं कभी उनका दर्द न समझ पायी
एक रोज़ अहसास हुआ कि क्यों कैद कर रखा है
हमने इन्हें इस पिंजरे में
आखिर क्या गुनाह है इनका...
शाम का वक्त था जब बैठी थी मैं उनके साथ
फिर मन में ख्याल आया और मैंने निश्चय किया
सुबह उठकर उन्हें आज़ाद कर दूंगी
उड़ा दूंगी इस खुले आसमान में
सुबह उठकर कर दिया उन्हें आज़ाद हमने
दर्द तो बहुत हुआ ....
क्योंकि बहुत प्यारे थे हमें वो
उन्हें आजाद करने के बाद बहुत रोयी मैं
शाम ढलते ही मुझे उनका ख्याल सताने लगा
इसी ख्याल के साथ जा पहुंची मैं छत पर
वहां जाकर देखा तो दंग रह गई
वहां का नज़ारा देखकर
सारे परिंदे वापस आ चुके थे
पर ये देखकर मैं कुछ समझ न पाई
कि उन्हें मुझसे लगाव हुआ था या फिर उस बसेरे से॥

Sunday, December 26, 2010

हम ऐसे क्यों हार जातें हैं......

हम ज़िन्दगी से ऐसे क्यों हार जाते हैं,
एक ही पल में सारा जहाँ झोड़ जातें हैं|
क्या चाहत है हमारी ज़िन्दगी से ,
हम उस पल वो भी भूल जातें हैं|
लोग कहतें हैं ये तो खेल है कुदरत का ,
ये तो किस्मत में लिखा है उस खुदा ने|
अगर कहीं खुदा है इस जहाँ में,
तो वो इतना बड़ा दर्द हमें कैसे दे पाता है||

Tuesday, December 21, 2010

किनारे कि तलाश में...

हम कश्ती में बैठे थे किनारे कि तलाश में ,
पर लहरों में कोई तो खलल थी ,
कोई तो तूफां था समंदर में|
हम समझना चाहते थे कि समन्दर,
इतना बेचैन क्योँ है आज |
हम कुछ भी समझ पाते ,
किनारा तलाश कर पाते |
उससे पहले ही हम अपनी कश्ती डूबा बैठे||

Wednesday, December 08, 2010

कब कहा था.................

हमें खुद पे गुरुर है ये हमने कब कहा था,
हम हर मुस्किल का सामना डट कर करेंगें ,
ऐसा हमने कब कहा था,
पर हम कमज़ोर भी तो न थे|

Friday, December 03, 2010

कोशिश

हर मुस्किल का सामना करना इतना आसान नहीं है,
एक कोशिश करके तो देखो.
अपना हौंसला बढ़ा के तो देखो,
रास्तें खुद-ब-खुद बन जायेंगें.

Saturday, September 16, 2006

कहाँ जायेंगे ?

तेरा प्यार हम इस तरह निभायेंगे,
तुम रोज खफा होना,हम रोज मनायेगें
पर मान जाना मनाने से तुम,
वरना ये भीगी पलके ले कर कहाँ जायेंगे हम ?

मुशकिल,..

चलते हुऎ तुफ़ान को रॊक पाना है मुशकिल,
टूटॆ हुऎ शीशॆ को जोड पाना है मुशकिल,
दिल आपको याद करता है कितना,
कुछ पंक्तियॊं में लिख पाना है मुशकिल ।

जन्नत,..

महक दोस्ती की इश्क से कम नही होती,
सिर्फ़ इश्क पर दुनिया खत्म नही होती,
साथ अगर हो जिंदगी में आप जैसे का,
जिंदगी जन्नत से कम नही होती ।

यादें ,..

आज हम यहाँ,कल हमारी यादॆं होंगी
जब हम ना होंगे,तब हमारी बातें होंगी,
कभी पलटोगे जिंदगी के ये पन्नॆ,
तो शायद आपकी आखोँ से भी बरसातॆ होंगी ।