Sunday, April 10, 2016

यहाँ खुद मिटकर खुद को पाना होता है...

ये दुनिया बड़ी अजीब है 
यहाँ खुद मिटकर खुद को पाना  होता है
लोगों की इस भीड़ में 
एक झूठा चेहरा दिखाना होता है 
खुद को गवां बैठे हैं हम 
कुछ कर दिखाने के चक्कर में 
हम तो बदलना नहीं चाहते थे 
हमें तो हालातों ने बदला है 
हम तो यह भी भूल चुके हैं... 
कि क्या बनने आये थे 
और क्या बन गए के रह गए हैं 
ज़िन्दगी की इस भागदौड़ में 
सही तो कहा है किसी ने 
कि यहाँ खुद मिटकर 
खुद को पाना  होता है !!!

6 comments:

  1. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 11/04/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 269 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

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    1. thank you so much..

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    2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  2. Anonymous12:32 PM

    यही कशमकश और यही फ़साना है
    खुद को मिटाकर ही खुद को पाना है

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  3. सच लिखा है ... सब कुछ मिटाना होता है खुद को पाने के लिए यहाँ .... अच्छी पंक्तियाँ हैं ...

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  4. बढ़िया रचना

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