Tuesday, July 22, 2014

रात बीत गई चाँद निहारते निहारते …

रात बीत गई चाँद निहारते निहारते …
पर तुम्हारी कोई खबर न आई

तुम्हारे इंतज़ार में
रात कब गुजर गई
पता ही न चला

तुम्हे समझ कर
करती रही चाँद
से बाते

और तुम भी तो...

कुछ चाँद की ही तरह हो
बस मेरी सुनते रहते हो
खुद कभी कुछ नहीं कहते

तम्हारी ख़ामोशी
कुछ तो कहती है
या शायद मैं
समझ नहीं पा रही

बेबसी फासलों की
कह लो
या वक्त की
पाबंदी

जो तुम्हे समझकर भी
तुमसे अन्जान हूँ

जब वक़्त मिले तब बताना
शायद हम भी तुम्हें  फुरसत  से
सुनना चाहतें हैं।।


Sunday, July 20, 2014

हमारी आद्या...



छोटी सी प्यारी सी है 
हमारी आद्या,
फूलों सी कोमल है 
हमारी आद्या,
जुगुनू की रोशनी  है 
हमारी आद्या,
धूप में पेड़ की छाँव है 
हमारी आद्या,
बारिश की ठंडी बौछार है 
हमारी आद्या,
एक मीठा सा एहसास है 
हमारी आद्या,
तभी तो गीतिका की दुलारी है 
हमारी आद्या।। 



Thursday, July 17, 2014

काश होते तुम बारिश की बूँद…

काश कही से आ जाते तुम
बारिश की बूँद की तरह, 

मन को दे जाते तसल्ली
तपती रेत पर ठंडी बौछार की तरह।

लो अब तो बारिश भी आ गई
पर तुम्हारा कोई पता नहीं,

अनजानी इस राह में
मेरा कोई हमसफ़र नहीं।

कैसे बुलाऊँ तुमको
खुद से मिलने,

जब मुझे खुद
तुम्हारा पता नहीं।।




Thursday, July 10, 2014

एक सूरत बनाई है...

सोंचती हूँ तुम्हारे बारे में
तुम्हारी सूरत के बारे में...

एक धुंधली सी तस्वीर बनाई है
पर समझ नहीं आता
कि तुम कौन हो।

जो भी हो
दिल के बहुत अच्छे हो
मन के बहुत सच्चे हो ।

नहीं पता तुम्हारी खूबियाँ
नहीं पता
तुम्हारी कमजोरियाँ ।

अभी अधूरी है
तस्वीर तुम्हारी
तो क्या हुआ ।

जिस दिन पूरी होगी
बताऊँगी  तुमको
तुम्हारे ही बारे में ।

मिलाऊँगी  तुमको तुमसे ही
तुम्हारी एक नई  पहचान
कराऊँगी तुमसे ही ।

बस इतना ही कहना है
अभी तुमसे…

जब मिलूँगी  तब बताऊँगी
कुछ अपने बारे में
और कुछ तुम्हारे बारे में ।

बस अभी तो तस्वीर पूरी करनी है
ताकि मिल सकूँ तुमसे
और मिला सकूँ तुमको तुमसे।।


Tuesday, June 17, 2014

हसरतें बाकी रह गईं....

कुछ हसरतें रह गई  बाकी
कुछ अरमान रह गए अधूरे

कुछ सपने तुम्हारे थे
कुछ सपने हमारे थे,

संजोया था हमने
मिलके जिनको,

फिर कहाँ से ये तूफां  आया
जिसे हम रोक न सके,

हमारे अरमानों की कश्ती
बह गई उस तूफां  में,

न दोष तुम्हारा था
न हमारा,

कमबख्त तूफां ही
गलत वक्त पर आया।। 





एक नई पहचान …

हाँ खुश हूँ
मैं बहुत खुश…

एक नई  पहचान  जो मिली है मुझे
एक नई  सोंच के साथ ...

क्या हुआ गर
तुम वफ़ा  न कर सके ...

क्या हुआ गर
तुम साथ न निभा सके ...

शायद तुम्हारी भी
कोई मज़बूरी रही हो ...

या शायद तुम्हारी बेवफाई ने
मुझे इतना मजबूत बना दिया...

कि  कोई झोका
हिला नहीं सकता ...

अब तो इरादे भी मज़बूत हो चुके हैं
और हम भी ...

तभी तो जीना चाहती हूँ
इस नई  पहचान के साथ।।

Monday, June 16, 2014

इस फादर्स डे पर ...वादा है मेरा...

इस दिन के बारे में सोंचती हूँ
तो कुछ समझ नहीं आता
कि  क्या लिखूँ ....
क्या लिखूँ  उस इंसान के बारे में
जो हमारे बीच है ही नहीं
पर हाँ उसकी यादें तो हैं
जिनके सहारे हम जीते हैं
हर दिन एक नए हौंसले के साथ उठते हैं।
नहीं हो तुम हमारे बीच
इस बात का  गम तो है
पर तुमने जो हमें ज़िन्दगी दी
वो क्या कम है।
हमें जीना सिखाया
अपने पैरों पर
खड़े होना सिखाया।
वादा है मेरा तुमसे ये
कि  न तोड़ेंगें उस वादे को
जो किया था तुमसे
और खुद से।। 

Wednesday, June 11, 2014

अच्छा लगता है....

तुमसे मिलना बातें करना
याद नहीं रहता वक़्त
कब गुजर जाता है,

घंटों तुम्हारे साथ बैठना
तुमसे बातें करना
अच्छा लगता है,

तुम्हारा हर बात पे
हंसी उड़ाना
मुझे भी हंसा जाता है

तुम्हारी हर बात पर
पागलों कि तरह हंसना
अच्छा  लगता है

हाँ तुम्हारा साथ और
तुमसे बात करना
अच्छा लगता है

पता नहीं कब तक
का साथ है हमारा
पर फिर भी तुम्हारे साथ वक़्त
बिताना
अच्छा लगता है

तुमसे बातें करना
अच्छा लगता है!!

Thursday, June 05, 2014

रिश्तों में शर्तें क्यों...

किसी भी रिश्ते में
शर्तों की क्या जरूरत
आज तक कभी समझ
में न आया.…

क्यों जीना हमें
शर्तों पे
क्या बिना शर्त
कोई रिश्ता नहीं बन  सकता.…

पर शायद एक रिश्ता है
जो बिना किसी शर्त
के चलता है....

माँ....
बिना किसी शर्त
रात भर जागकर
धूप  में तपकर

हमें जीवन देती है
जीना सिखाती है
हमारी हर जरूरत को
पूरा करती है.…

सबसे अनमोल रिश्ता है
जो बिना किसी
शर्त के चलता है।।    

Wednesday, June 04, 2014

आईने की तलाश,..

खुद को समझाना चाहती हूँ,

हर दर्द खुद से बतलाना चाहती हूँ
आज गर कोई पास होता मेरे,
तो ऐसा करने की चाहत ना होती
हर कागज पर इक आईना,
तलाशने की हसरत न होती ।