हाँ खुश हूँ
मैं बहुत खुश…
एक नई पहचान जो मिली है मुझे
एक नई सोंच के साथ ...
क्या हुआ गर
तुम वफ़ा न कर सके ...
क्या हुआ गर
तुम साथ न निभा सके ...
शायद तुम्हारी भी
कोई मज़बूरी रही हो ...
या शायद तुम्हारी बेवफाई ने
मुझे इतना मजबूत बना दिया...
कि कोई झोका
हिला नहीं सकता ...
अब तो इरादे भी मज़बूत हो चुके हैं
और हम भी ...
तभी तो जीना चाहती हूँ
इस नई पहचान के साथ।।
मैं बहुत खुश…
एक नई पहचान जो मिली है मुझे
एक नई सोंच के साथ ...
क्या हुआ गर
तुम वफ़ा न कर सके ...
क्या हुआ गर
तुम साथ न निभा सके ...
शायद तुम्हारी भी
कोई मज़बूरी रही हो ...
या शायद तुम्हारी बेवफाई ने
मुझे इतना मजबूत बना दिया...
कि कोई झोका
हिला नहीं सकता ...
अब तो इरादे भी मज़बूत हो चुके हैं
और हम भी ...
तभी तो जीना चाहती हूँ
इस नई पहचान के साथ।।
