परेशां होने पर मेरा हाँथ पकड़कर
ये कहना सब ठीक हो जाएगा।
हर वक्त मेरे साथ रहना
मेरा साथ निभाना
और दोस्ती का हर फ़र्ज़ अदा करना।
मेरी छोटी - बड़ी गलतिओं को
नदरअंदाज़ करना,
और मेरे पास आके ये कहना
मैं हूँ ना …
कभी दादी माँ की तरह
मेरे सिर पर हाँथ फेरना।
तेरा मुझे वो समझाना ,
डाटना, रूँठना, मनाना।
सब संजोया है इस दिल में मैंने
एक प्यार तेरे जैसा
अज़ीज़ दोस्त पाया है मैंने।।
