ये खामोश रातें
और तुम्हारी यादें
कितनी समानता है इनमें
न तुम कुछ बोल रहे हो
न ये रातें
बस शान्त …
समंदर की गहराई की तरह
शिकायत करूँ भी तो किससे
इन तन्हा रातों से
या तुम्हारी खामोशी से
हाँ पता है मुझे कि
तुम सुनके भी अनसुना करोगे
और शायद इन स्याह रातों के पास
जवाब नहीं है कोई।।



