Saturday, August 23, 2014

माना कि बहुत मुश्किल है …

माना  कि  बहुत मुश्किल है
किसी को समझ पाना
उससे भी मुश्किल है
उसके करीब आना ।

पर हर कोई एक
जैसा तो नहीं होता
जैसे हर दर्द एक
सा नहीं होता ।

और हम हर किसी को
एक जैसा नहीं समझ सकते
क्योंकि हर चेहरे का रंग
एक जैसा नहीं होता ।

फिर अपनी ज़िन्दगी में
हज़ार यादें  होती हैं
कुछ कड़वी कुछ मीठी
पर सबका अपना अलग रंग है ।

हम इन सबकी वज़ह से
सभी से मुहँ तो नहीं मोड़ सकते
ज़िन्दगी पुरानी यादों
के सहारे तो नहीं जी सकते ।

फिर से किसी पे भरोसा करना
गलत तो न होगा
इस सोंच के साथ
ज़िन्दगी बिताना सही भी तो न होगा।।

27 comments:

  1. सुंदर रचना
    प्रतिभा जी। एक सत्य।

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 24/08/2014 को "कुज यादां मेरियां सी" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1715 पर.

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    1. Thank you so much Rajiv ji...

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  3. सही-ग़लत की समस्या ही तो सबसे गड़बड़ हो जाती है १

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  4. सुंदर रचना

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  5. बहुत सुंदर रचना

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  6. आपकी सुंदर रचना
    https://www.facebook.com/groups/605497046235414/ यहाँ है .... आप भी आइये

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  7. आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 25 . 8 . 2014 दिन सोमवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  8. bahut sundar baat kahi aapne ....

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  9. बहुत ही अच्छी रचना है

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  10. भरोसा टूट जाने के बाद फिर से भरोसा मुश्किल होता है , मगर जिंदगी को चलने के लिए फिर फिर भरोसा जरुरी भी !
    अच्छी रचना !

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  11. वाह बहुत सुन्दर कृति

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  12. किसी पर भरोसा करने के लिए भी एक बड़ा दिल चाहिए। भरोसे का टूट जाना तो एक आम बात है मगर किसी पर भरोसा करना एक बड़ी बात है। जिस तरह पांचों उँगलियाँ बराबर नहीं होती। वैसे ही हर इंसान एक सा नहीं होता। मगर एक इंसान को दूसरे से सामाज्स्य बिठाना ही पड़ता है और ऐसे में इस सबका बस एक ही इलाज है प्यार बाँटते चलो...

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  13. वाह प्रतिभा जी बहुत सुन्दर रचना ।

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  14. ज़िन्दगी के सारे रंगों को जीना ही ज़िन्दगी है. सुन्दर रचना, बधाई.

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  15. माना कि बहुत मुश्किल है
    किसी को समझ पाना
    उससे भी मुश्किल है
    उसके करीब आना ।

    बहुत सुन्दर बात

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  16. बहुत सुन्दर रचना

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