Sunday, August 10, 2014

प्यार के दो धागे...

माना कि है
ये त्योहार कुछ
रश्मों का

पर प्यार बहुत
है उन अनमोल
पलों का

हाँ याद हैं
वो सभी पल
वो बचपन की बातें

वो हमारा
लड़ना झगड़ना
और वो सरारतें

ये प्यार के दो धागे
कैसे जोड़ते हैं
एक रिश्ते को

बड़ी ही सहजता
के साथ
संजोया है इस रिश्ते को!!









14 comments:

  1. भाई बहन के सुन्दर पलों को बाखूबी शब्द दिए हैं ...
    रक्षाबंधन की शुभकामनायें ...

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (11-08-2014) को "प्यार का बन्धन: रक्षाबन्धन" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1702 पर भी होगी।
    --
    भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक
    पावन रक्षाबन्धन पर्व की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. भाई बहन का अनमोल रिश्ता।
    सुंदर रचना।

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  4. बेहद उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ
    रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें....

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  5. एक सैलाब सा उमड़ आता है बीती यादों का. सुन्दर रचना.

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  6. ये प्यार के धागे जोडते हैं, मजबूत करते हैं रिश्तों को।

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  7. ये धागे कीमती हैं !! मंगलकामनाएं !!

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  8. बहुत सुन्दर...रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें!

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  9. बहुत सुंदर

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  10. प्यार के इस त्यौहार पर आपकी ये प्यारी रचना .. बहुत सुन्दर :) राखी की अनन्त शुभकामनाये

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  11. sunder dhaage...sunder rachna...

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  12. उम्दा रचना

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