Wednesday, July 30, 2014

वो कच्ची पक्की सी यादें ...

याद हैं मुझे तुम्हारे साथ
बिताये हर पल
जिनमें तुम थे
और हमारा छोटा
सा परिवार
हँसता खेलता
एक प्यारा सा
संसार
वो बचपन की यादें
वो मेरी सरारतें
तुमको दुखी करके
मेरा वो खुश हो जाना
फिर प्यार से तुम्हारे
पास आके तुम्हारे
गले से लग जाना
मुझे माफ़ करके
तुम्हारा वो खुश हो जाना 
वो कच्ची पक्की सी यादें
क्यों कर रही हैं
परेशाँ  मुझे
आखिर आज क्यों
तुम इतना याद आ
रहे हो
बचपन की हर याद को
मेरे सामने ला रहे हो
रोने का मन तो बहुत है
पर मुझे रोना नहीं है
हाँ मुझे पता है
मैं कमजोर हो रही हूँ
पर क्या करूँ मैं भी
तो आखिर एक इंसान हूँ। ।




17 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 31/07/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  2. दिल को छूती भावपूर्ण रचना...

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31-07-2014 को चर्चा मंच पर { चर्चा - 1691 }ओ काले मेघा में दिया गया है
    आभार

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  4. बहुत बढ़िया

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  5. बहुत ही बढ़िया


    सादर

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  6. ये यादों का कसूर है जो दिल में रहती हैं और उसे कमजोर करती हैं ...
    पर बाहर फैंकी भी तो नहीं जाती ...

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  7. यादेम कमजोर भी करती हैं और चट्टान भी बनाती हैं,तभी तो हम आग का दरिया भी
    पार कर जाते हैं उससे मिलने के लिये जिसकी याद हमें आती है.

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  8. दिल को छूती भावपूर्ण रचना...

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  9. काश ! की यादें rewards button होती जिंदगी का :)

    बहुत शानदार लेखनी

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  10. दिल को छूती बहुत ही बढ़िया रचना...

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  11. सुंदर रचना,,,

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  12. सुंदर रचना

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