Thursday, July 17, 2014

काश होते तुम बारिश की बूँद…

काश कही से आ जाते तुम
बारिश की बूँद की तरह, 

मन को दे जाते तसल्ली
तपती रेत पर ठंडी बौछार की तरह।

लो अब तो बारिश भी आ गई
पर तुम्हारा कोई पता नहीं,

अनजानी इस राह में
मेरा कोई हमसफ़र नहीं।

कैसे बुलाऊँ तुमको
खुद से मिलने,

जब मुझे खुद
तुम्हारा पता नहीं।।




13 comments:

  1. बहुत खूब प्रतिभा जी।

    सादर

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  2. वाह ....बहुत खूब

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  3. सुंदर रचना

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  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 20/07/2014 को "नव प्रभात" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1680 पर.

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  5. कल 20/जुलाई /2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  6. बहुत खूब

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  7. अच्छी रचना.

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  8. ये बारिश की बूँदें भी आती हैं पर उनके बिना .. तरसाती हैं फिर जैसे अगन ...

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  9. सुंदर भावाभिव्यक्ति…

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  10. बहुत सुन्दर और भावप्रणव प्रस्तुति।

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  11. सुंदर प्रस्तुति.

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