Friday, February 08, 2013

तुम्हारी याद में ...(कुछ शिकायतें )

हमें आज फिर वो दिन याद आ रहे हैं 
जब तुम हमारे साथ थे,
आज ही का वो दिन है जिसके बाद 
तुम हमारे बीच नहीं हो।
आज ही तो वो दिन है 
जो कई साल पीछे छोड़ आई हूँ,
लौट जाना चाहती हूँ उन पलों में 
वापस बुलाना चाहती हूँ तुम्हे।
बस तुम्हारा एहसास ही तो साथ है 
जो एक पल भी दूर जाता नहीं,
कैसे कहूँ किससे कहूँ 
कि कितना याद आ रहे हो तुम।
कभी-कभी तो दिल करता है 
कि आके लग जाऊं तुम्हारे गले से, 
छोड़ के इस दुनिया के सारे भ्रम।
फिर पीछे देखती हूँ तो एहसास होता है 
की तुम्ही ने तो दी हैं ये जिम्मेदारियां,
ये माँ की सूनी आँखे 
और भाई के सपने।
आखिर कैसे मुहँ मोड़ सकती हूँ इनसे 
मैं तुम्हारी तरह नहीं हो सकती, 
तुम्हारे जैसा भी नहीं कर सकती 
क्यूंकि मुझे एहसास है उन जिम्मेदारिओं का 
जो तुमने मुझे दी हैं,
निभाउंगी इन्हें पूरी लगन से 
न छोडूंगी इनका साथ कभी तुम्हारी तरह।।

I Love you Papa ...miss you so much ...




17 comments:

  1. :-(

    यादें तो संबल देती हैं न....

    अनु

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  2. संकल्पबद्धता ,कृत संकल्पों की रचना ,दृढ़ता हौसले पे कायम रहने का संकल्प और मंसूबा लिए है यह पोस्ट .बढ़िया प्रस्तुति .

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  3. संकल्पबद्धता ,कृत संकल्पों की रचना ,दृढ़ता हौसले पे कायम रहने का संकल्प और मंसूबा लिए है यह पोस्ट .बढ़िया प्रस्तुति .

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  4. वाह !!सुन्दर रचना

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  5. बहुत भावपूर्ण लिखा है.....

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  6. संकल्पबद्धता ही जीवन में आगे बढ़ने के लिए हौसला देते है

    RECENT POST: रिश्वत लिए वगैर...

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  7. Yadon ko sambal banaiye ... Jane wale hamesha sath ragte hain ... Bhavpoorn rachna ...

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  8. बहुत ही बढ़िया


    सादर

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  9. बहुत सुन्दर कविता |

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  10. फिर पीछे देखती हूँ तो एहसास होता है
    की तुम्ही ने तो दी हैं ये जिम्मेदारियां,
    ये माँ की सूनी आँखे
    और भाई के सपने।
    आखिर कैसे मुहँ मोड़ सकती हूँ इनसे ....
    बहुत खूबसूरत रचना

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  11. Very Heart touching Lines. May God give you strength.

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  12. व्यंग्य विनोद प्रेम रस संसिक्त प्रेम दिवस प्रणय गौरव गाथा .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  13. व्यंग्य विनोद प्रेम रस संसिक्त प्रेम दिवस प्रणय गौरव गाथा .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  14. इस रचना पर मैं कोई टिपण्णी नहीं दे सकता | मैं निशब्द हूँ क्योंकि मैं भावुक प्राणी हूँ | बस इतना कहूँगा के मज़बूत रहो और धीरज धरो | प्रभु आपके पिताजी की आत्मा को शांति दें | वो जहाँ भी रहें खुश रहे | श्रद्धांजलि |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  15. Sundar Kriti... It relates to me also...

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