Thursday, February 14, 2013

प्रीत की रीत ...

प्रीत की रीत भी बड़ी प्यारी है,
एक महका सा एहसास
तो कभी खुशियों आभास है ये ...

कभी बारिश की बूंदों की तरह
रिमझिम करता सावन है ये ...

कभी बसंत में खिले हुए फूलों पर
भवरों का एहसास है ये ...

तो कभी अँधेरी रातों में
जुगुनुओं की रोशिनी है ये ...

कभी अनछुई सी यादें
तो कभी तुम्हारा एहसास है ये।।




20 comments:

  1. प्रीत एह गहरा एहसास है ... छाया रहता हैं मन मंदिर में हमेशा ... सुन्दर रचना ...

    ReplyDelete
  2. बहुत ही बढ़िया


    सादर

    ReplyDelete
  3. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete


  4. कभी अनछुई सी यादें
    तो कभी तुम्हारा एहसास है ये।।-----प्रेम के अहसास की अनछुई
    अभिव्यक्ति
    बहुत बहुत बधाई





















    ReplyDelete
  5. मुद्दते गुजरी तेरी याद भी आई न हमे,
    और हम भूल गए हो तुझे ऐसा भी नही!(फिराक)

    बहुत शानदार उम्दा प्रस्तुति,,,

    recent post: बसंती रंग छा गया

    ReplyDelete
  6. बढ़िया प्रेम रचना -एहसास तेरी प्रीती का तुझसा ही है प्यारा हमको .

    ReplyDelete
  7. बसन्त पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ!


    दिनांक 16 /02/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  8. सुन्दर अहसास लिए सुन्दर रचना...
    ;-)

    ReplyDelete
  9. प्यारा सा बस प्यार - प्यार बेशुमार ......

    ReplyDelete
  10. मीत की प्रीत मोहे ऐसो लागी
    मैं हो गई रे दीवानी
    चार पहर अब बीत सकें न
    बिन पी सूनी जीवन फुलवारी

    बहुत सुन्दर रचना प्रतिभा | बधाई

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    ReplyDelete
  11. सुंदर रचना..

    ReplyDelete
  12. बहुत - बहुत शुक्रिया यशवंत जी ...

    ReplyDelete



  13. ♥✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥❀♥✫¨*•❁❀✿¨*•❁♥❀♥✿♥
    ♥बसंत-पंचमी की हार्दिक बधाइयां एवं शुभकामनाएं !♥
    ♥✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥❀♥✫¨*•❁❀✿¨*•❁♥❀♥✿♥



    प्रीत की रीत भी बड़ी प्यारी है,
    एक महका सा एहसास
    तो कभी खुशियों का आभास है ये ...

    सच है ...
    प्रतिभा जी !

    सुंदर भाव ! सुंदर कविता !

    संपूर्ण बसंत ऋतु सहित
    सभी उत्सवों-मंगलदिवसों के लिए
    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !
    राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  14. वहा क्या बात है बहुत ही अच्छी रचना
    उतने ही प्यारे अहसास
    मेरी नई रचना
    फरियाद
    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ
    दिनेश पारीक

    ReplyDelete
  15. बहुत खूब लिखा है एहसासों को शब्द पैरहन पहराया है .

    ReplyDelete
  16. प्रेम की खूबसूरत परिभाषा, बहुत खूब

    ReplyDelete
  17. प्रीत सतरंगी होती ही है...............प्यारी होती ही है........सर्वथा स्वार्थ विहीन होती है अतः मात्र सच्ची प्रीत अनुकरणीय होती है............

    ReplyDelete
  18. प्रीत सतरंगी ही होती है.............

    ReplyDelete
  19. Bas ye silsilaa rukna nhi chahiye...
    Sundar kavita.

    ReplyDelete