Thursday, February 19, 2015

तुम्हे मेरी इतनी फ़िक्र क्यों है...



हाँ अभी कुछ दिनों पहले 
तुमने कहा था मुझसे कि 
तुम्हारी हँसी अच्छी लगती है 
जब उस दोराहे पे 
मैं तुम्हारा हाँथ 
थाम कर चल रही थी 
तब तुमने मेरी 
तरफ देखकर 
कहा था…
हमेंशा यूँ ही 
मुस्कराती  रहना  
क्यूंकि तुम हँसते 
हुए अच्छी लगती हो 
मैंने तुम्हारी आँखों में 
एक फ़िक्र देखी थी 
जो मेरे लिए थी 
उस वक़्त मैंने तुम्हारी 
बात को हँसी  में टाल दिया था 
पर वक़्त बेवक़्त ये बात 
याद तो आती है मुझे 
पर समझ नहीं पाई 
कि तुम्हे मेरी इतनी 
फ़िक्र क्यों है!!!


9 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (20.02.2015) को "धैर्य प्रशंसा" (चर्चा अंक-1895)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  2. बहुत ही सुंदर और प्रेम को दर्शाती पंक्तिया .....
    मेरे ब्लॉग पर आप सभी लोगो का हार्दिक स्वागत है.

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  3. खूबसूरत।
    अभिव्यक्ति पसंद आयी।

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  4. प्यार के अतिरेक में बहते कहे शब्द कई मायने निकाल जाते हैं ,खूबसूरत कृति प्रतिभा जी

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  5. प्रेम को कई बार समझना आसान कहाँ होता है ...

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  6. आज 25/फरवरी /2015 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  7. क्या बात है ......... दिल को छूने वाली पंक्तिया!

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