Thursday, January 29, 2015

आज किनारे पर बैठकर...

आज किनारे पर बैठकर
समंदर की लहरो को देखा
तो ख्याल आया
कहीं न कहीं ये समंदर
तुम्हे छू रहा होगा
कुछ अलग ही एहसास था
हाँ शायद …
तुमसे दूर  होने का
या समंदर के सहारे
तुम्हे अपने पास
महसूस करने का
पता नहीं…
पर हाँ किनारे बैठकर
बार बार दिल यही
कह रहा था …
इस समंदर के किसी
छोर पर तुम हो
ये प्यारा सा एहसास
शायद मुझे कहीं छू रहा था!!

13 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (30.01.2015) को ""कन्या भ्रूण हत्या" (चर्चा अंक-1874)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  2. बहुत ही खूबसूरत एहसास

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  3. सुंदर अभिव्यक्ती ...प्यार का एहसास ...छू रहा था

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  4. कुछ पल बाँध लेते हैं मन को और थमा देते हैं दूसरा किनारा प्रेम को ...
    सनुम्दर भी कुछ ऐसा ही एहसास है ...

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  5. किसी छोर पर उसके होने का अहसास ही काफी है जीने के लिये..बहुत सुन्दर रचना...

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  6. आज 05/ फरवरी /2015 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  7. बहुत सुन्दर...

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  8. Beautifully written ..

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