Wednesday, January 07, 2015

पलकों में आज फिर ये नमी क्यों आई है...

पलकों में आज फिर
ये नमी क्यों आई है
शायद तुम्हारी कमी
आँखों में इसे लेके आई है
शिकवा करूँ भी तो किससे
तुमसे या इस खुदा  से
जिसने तुम्हारी साँसें
तुम्ही से चुराई हैं
 आज फिर उन लम्हों
को महसूस किया हमने
कह नहीं सकती
कितना दर्द हुआ हमको
पर पूछना चाहती हूँ
तुमसे भी एक बात
क्या तुम्हे भी इतना ही
दर्द होता है !!!

8 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 8-01-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1852 में दिया गया है
    धन्यवाद

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  2. वाह ! बहुत खूब प्रतिभा जी

    सादर

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  3. वाह !
    मंगलकामनाएं !

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  4. दिल को छु लेने वाला एहसास।
    बेहतरीन।

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  5. जहां चाह वहां राह ... उनको भी दर्द है जरूर ...

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  6. अच्छी भावाभिव्यक्ति

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