Wednesday, March 08, 2017

हाँ मुझे फ़क्र है ...

हाँ मुझे फ़क्र है
खुद के आस्तित्व पे
गुरूर है...
खुद के वज़ूद पे
घमंड है उस जननी पे
जिसने इस दुनिया में
लाने का हौंसला दिखाया
और अपने आँचल की
छाँव में रखकर...
इस ज़माने से बचाया
शुक्रिया अदा करती हूँ
उस जननी को
जिसने आंधी बनकर
मेरे आस्तित्व को बचाया
हाँ ख़ुश  हूँ मैं...
कि हे जननी तूने मुझे
नारीत्व का एहसास कराया !!

7 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 09 मार्च 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. ऐसा कमाल का लिखा है आपने कि पढ़ते समय एक बार भी ले बाधित नहीं हुआ और भाव तो सीधे मन तक पहुंचे !!

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  3. बहुत भावपूर्ण कविता है।

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  4. बहुत सुन्दर......

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  5. सुन्दर रचना

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  6. Naari ke man ki bat bahut hi sundar tarike se vyakt ki hai aapne.

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