Monday, December 30, 2013

अब शब्द नहीं मिलते ....

क्या लिंखुँ  अब खुद से
क्या कहूं  तुमसे
कि अब शब्द नहीं मिलते!!

कुछ कहने की  चाहत तो है
पर शायद तुम सुन न पाओगे
अब कहने सुनने  को शब्द नहीं बचते !!

वक्त का पहरा भी
कुछ इस कदर है हमपे
कि कुछ लिखने को पल नहीं मिलते!!

लिखने की  कोशिश की
तो लिख भी न पाई
कि इस  दिल में ख्वाब नहीं रहते !!





15 comments:

  1. पर कोशिश लगातार हो तो बदलाव आता है ...
    भाव भी आएंगे ...

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (31-12-13) को "वर्ष 2013 की अन्तिम चर्चा" (चर्चा मंच : अंक 1478) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    2013 को विदायी और 2014 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. नए साल में नए भाव भावनाएं
    आयेंगे ऐसे अनेक कल्पनाएँ |
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट नया वर्ष !
    नई पोस्ट मिशन मून

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  4. यही तो अजीब कश्मकश है ज़िंदगी का ..कभी शब्द नही मिलता तो कभी इज़हार नही होता..

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  5. न लिखते हुए भी आपने सुन्दर लिख दिया.
    अनुपम भावाभिव्यक्ति

    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  6. सुन्दर कोमल प्रस्तुति :) बधाई नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये :)

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  7. ...फिर भी कहता रहे मन,चलता रहे लेखन!
    शुभकामाएं!

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  8. बहुत सुंदर----
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    नववर्ष की हार्दिक अनंत शुभकामनाऐं----

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  9. कुछ कहने की चाहत तो है
    पर शायद तुम सुन न पाओगे ...

    sunder rachna ...

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  10. -सुंदर रचना...
    आपने लिखा....
    मैंने भी पढ़ा...
    हमारा प्रयास हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना...
    दिनांक 24/04/ 2014 की
    नयी पुरानी हलचल [हिंदी ब्लौग का एकमंच] पर कुछ पंखतियों के साथ लिंक की जा रही है...
    आप भी आना...औरों को बतलाना...हलचल में और भी बहुत कुछ है...
    हलचल में सभी का स्वागत है...

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  11. बहुत सुंदर.....

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  12. मुझे टिप्पणी करने के लिए सच में कोई शब्द नहीं मिलते। बहुत खूब

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