Tuesday, October 22, 2013

कुछ पल बेफिक्री के …

कुछ पल तो बेफिक्री के
बिताओ कभी यारों के साथ,

बिना किसी चिंता बिना किसी डर  के 
बेसुरे राग में कुछ तो गुनगुनाओं यारों के साथ 

कभी रातों में सड़क पर निकल के 
चाय की चुस्कियां लगाओ यारों के साथ 

कभी बिना बुलाये मेहमान की तरह 
दोस्तों के घर पहुँच जाओ बिना बताये 

यही तो वो दिन हैं वो उम्र है 
जहाँ हम हैं यारों के साथ 

फिर क्यों  न कुछ पल बेफिक्री के 
बिताओं यारों के साथ !!

10 comments:

  1. खुश रहने के कारगर नुख्से

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  2. बहुत ही बढ़िया



    सादर

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (23-10-2013)   "जन्म-ज़िन्दग़ी भर रहे, सबका अटल सुहाग" (चर्चा मंचःअंक-1407)   पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत खूब

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  5. आज की मारामारी में कुछ पल का सुकून तो ऐसे ही मिलेगा ... बेफिक्री के कुछ पल ढूंढती सुन्दर रचना ...

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  6. कुछ तो बेफिक्री के पल होने ही चाहिए जीवन में,
    बहुत प्यारी रचना आभार !

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  7. कुछ पल तो बेफिक्री के
    बिताओ कभी यारों के साथ,

    बिना किसी चिंता बिना किसी डर के
    बेसुरे राग में कुछ तो गुनगुनाओं यारों के साथ
    क्‍या बात है .... सुन्‍दर भाव‍ लिये बेहतरीन प्रस्‍तुति

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  8. काश आज की भाग दौड़ से भरी ज़िंदगी में कुछ पल बेफिक्री के बिता पायें दोस्तों के साथ...बहुत सुन्दर

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  9. Kuch Pal Ki hai Zindagani.

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