Wednesday, March 20, 2013

"चाँद से करती हूँ बातें "




कभी- कभी चाँद से करती हूँ बातें 
कुछ अपनी कहती हूँ 
कुछ उसकी सुनती हूँ 
हम घंटों बैठतें हैं साथ 
खामोश रातों में 
तन्हाई में 
कुछ शिकायतें 
और कुछ शिकवों के साथ 
हकीकत से परे 
बस अपनी ही दुनिया में 
जहाँ होते हैं मेरे 
बहुत सारे सवाल 
और मेरे खुद के 
कुछ एक जवाब!!




40 comments:

  1. हम घंटों बैठतें हैं साथ
    खामोश रातों में
    तन्हाई में
    कुछ शिकायतें
    ---------------
    कुछ मनभावन बातचीत का मौन दर्द ..

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  2. हम घंटों बैठतें हैं साथ
    खामोश रातों में
    तन्हाई में
    कुछ शिकायतें
    ---------------
    कुछ मनभावन बातचीत का मौन दर्द ..

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  3. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति,चाँद से जबाब मिलता है की नहीं.

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  4. भाषा सरल,सहज यह कविता,
    भावाव्यक्ति है अति सुन्दर

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  5. सहज,सुंदर,भावपूर्ण ... चाँद से बातें इसी तरह तो करते हैं ... :)

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  6. कुछ मेरी सुन कुछ अपनी सुना ए दोस्त हम दोनों ही तो हैं तन्हा -----तन्हाई में चाँद से अच्छा दोस्त कहाँ मिलेगा बहुत बढ़िया बधाई आपको

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  7. dilchasp mulaqat...chaand...khoobsurat sathi...

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  8. बेहतरीन !


    सादर

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  9. वाह जग सोया तुम जागे चाँद से करते बातें ....सुन्दर ख्याल |


    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  10. खामोश रातों में
    तन्हाई में
    कुछ शिकायतें ..bilkul sahi wakt ....very nice,....

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  11. सवाल जवाब खुद से हो जाएं वो भी चाँद के बहाने तो आब ही क्या है ...
    भावमय रचना ...

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  12. परी लोक फेंटेसी की दुनिया भी असली होती है .भाव जगत रागात्मकता का अपना संसार है .

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  13. सोच कही और जाने लगी थी ...... अच्छा किया जल्दी राज खोल दिया की खुद से बतिया रही थीं - बहुत सुंदर

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  14. मासूमियत से लबरेज

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  15. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-03-2013) के चर्चा मंच 1193 पर भी होगी. सूचनार्थ

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  16. बहुत - बहुत शुक्रिया अरुन जी ...

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  17. बहुत सुंदर रचना ...

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  18. चाँद की खामोशी भी बहुत कुछ बोलती है .....

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  19. सुन्दर अहसास लिए रचना...
    :-) बहुत खूब....

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  20. बहुत अच्छी पंक्तियाँ, हम भी ऐसे ही बातें हैं .. :)
    मधुरेश

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  21. दम भर जो उधर मुंह फेरे ओ !चंदा मैं उनसे प्यार कर लूंगी ,बातें हजार कर लूंगी ....

    चाँद जाने कहाँ खो गया ,उनको चेहरे से पर्दा हटाना था ........


    फाग मुबारक फाग की रीत और प्रीत मुबारक

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  22. बहुत खूब ......खूब जमेगी जबी मिल बैठेंगे यार दो .....
    Chand se chand kii baatein karenge
    kuchh kahenge dil kii baatein
    kuchh unke dil ki baatein sunenge
    Band aankhon se hansi nazara karenge
    dhadkano kii lay pe saanson ke geet
    vo bhi sunenge ,ham bhi sunenge
    Chand se chand kii baatein karenge........

    Poonam

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  23. sundar ehsas say bhari rachna....

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  24. खामोशी ,खामोश रातों में
    तन्हाई , रीत और प्रीत, मासूमियत चेहरे से पर्दा हटाना और जाने.......बहुत खूब

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  25. सच जब कोई न सुने तब चाँद तो अपना ही है चुपचाप सुन लेता है हमारी दिल की बात ...
    बहुत बढ़िया ...

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  26. what a feeling,very deedp nice creation

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  27. बहुत सुन्दर भाव . आप सौभाग्यशाली हैं, आप चाँद से बात करती है. मुझे अपनी एक कविता की दो पंक्ति याद आती है :
    बहुत दिन हुए खुले आकाश में रात नहीं हुई,
    बहुत दिन हुए चाँद से मुलाकात नहीं हुई .

    सादर ,
    नीरज 'नीर'

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  28. .बहुत खूब सहज,सुंदर पंक्ति

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  29. बहुत सुन्दर भाव!

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  30. प्यारे शब्द. काश वो दिन लौट आते. अब चाहकर भी चाँद नहीं देख पाते.

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  31. हम घंटों बैठतें हैं साथ
    खामोश रातों में
    तन्हाई में...
    ... ... ...
    ...जहाँ होते हैं मेरे
    बहुत सारे सवाल
    और मेरे खुद के
    कुछ एक जवाब!!


    चांद के साथ मिलना सचमुच रोचक है
    प्रतिभा जी
    ख़ूबसूरत कविता पढ़वाने के लिए शुक्रिया !


    आपको सपरिवार होली की बहुत बहुत बधाई !
    हार्दिक शुभकामनाओं मंगलकामनाओं सहित…

    -राजेन्द्र स्वर्णकार


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  32. वाह... बहुत ही सुंदर

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  33. कोमल अहसासों से सजी कविता..

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  34. बहुत सुंदर और कोमल भावाभिव्यक्ति
    आपको रंगोत्सव की शुभ-कामनाएं.....
    साभार......

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  35. बहुत सुन्दर लेखन

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  36. कहीं गुम कर देती हुई कविता ...
    कुछ ऐसी ही एक कविता >>
    http://corakagaz.blogspot.in/2012/12/mujhe-le-chalo.html

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