Monday, December 19, 2016

कब्र खोदने से सुकून नहीं मिलता ....

कब्र खोदने से सुकून नहीं मिलता 
न ही ज़िन्दगी की खोई हुई वो शाम !

खुद को बदलने के लिए हौंसला ही काफी है 
मिलता नहीं मांगने से वो आसमाँ !

फ़रिश्ते हमें मिलते नहीं यूँ ही 
न ही मिलता है ज़िन्दगी का वो एहसास !

काश कि  ऐसा होता काश कि  वैसा होता 
उम्मीदों का ताना बाना कुछ ऐसा ही होता है !

जो मिलें हैं ये पल नसीब से 
वो कुछ तुम्हारे हैं और कुछ हमारे !

न डालो फ़िक्र की राख अब तुम इनपे 
कि अब वक़्त नहीं है फिर धूमिल होने का !!

4 comments:

  1. Waah kya khub likha hai.

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  2. दिनांक 20/12/2016 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद... https://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
    आप भी इस प्रस्तुति में....
    सादर आमंत्रित हैं...

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  3. बहुत खूब

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  4. सुन्दर शब्द रचना
    नव बर्ष की शुभकामनाएं
    http://savanxxx.blogspot.in

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