Friday, August 19, 2016

कुछ खट्टे मीठे पलों की दे रही हूँ ये यादें ...



कुछ खट्टे मीठे पलों की 
दे रही हूँ ये यादें ,
उम्मीद है संभाल  के रखोगे !
ज़िन्दगी की इस दौड़ में 
इस दोस्त को तो याद रखोगे !
कहने के लिए तो बहुत कुछ है 
मगर अभी के लिए 
बस इतना ही कहना है... 

"खुद पे रखना भारोसा 
न ही कभी उम्मीद खोना 
हालातों से हारना आशां है मगर 
नामुंमकिन तो नहीं... 
सब मिल जाएगा वक़्त पे 
बस हौंसले के साथ 
आगे बढ़ते रहना !!"




3 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (21-08-2016) को "कबूतर-बिल्ली और कश्मीरी पंडित" (चर्चा अंक-2441) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सुन्दर रचना

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  3. प्रेरक रचना

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