Saturday, June 06, 2015

वक़्त मिला तो सोंचा...

आज कुछ वक़्त मिला तो सोंचा 
ज़िन्दगी के कुछ पन्ने पलट के देख लूँ 
सुना था लोगों को कहते हुए 
कि ज़िन्दगी इतनी आसाँ नहीं होती 
शायद ये बात अब समझ में आई 
हालाँकि  सुनने और समझने में 
फरक बहुत है 
तभी तो शायद इतना वक़्त लग गया 
इस फरक को समझने में 
हाँ कदम थोड़े डगमगाए जरूर थे 
लेकिन हौंसले की कमी  न थी !!!

9 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-06-2015) को "गंगा के लिए अब कोई भगीरथ नहीं" (चर्चा अंक-1999) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-06-2015) को "गंगा के लिए अब कोई भगीरथ नहीं" (चर्चा अंक-1999) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. जिंदगी ही बताती है कि‍ वो क्‍या है....पर वक्‍त आने पर। अच्‍छा लि‍खा।

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  4. बहुत सुन्दर

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  5. वाह! बहुत ख़ूब

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  6. बस होंसला ही जरूरी है ...जिंदगी आसान तो कभी भी नहीं होती ...

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  7. बहुत सुन्दर

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  8. सुन्दर सृजन

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