चाँद
सोचती हुँ कि गर वो पराया है तो अपना क्या है,
शाम से चाँद तो साथ है मेरे ,
फिर आज आसमान में निकला क्या है ?
सोचती हुँ कि गर वो पराया है तो अपना क्या है,
तेरा प्यार हम इस तरह निभायेंगे,
फूल बन कर मुस्कुराना जिंदगी है,
नम पलकों के साये में छुपा लें आपकॊ,
चलते हुऎ तुफ़ान को रॊक पाना है मुशकिल,
महक दोस्ती की इश्क से कम नही होती,