याद किया करती हूँ,..
दर्द के दरबार में फ़रियाद किया करती हूँ,
रात तन्हाई की आबाद किया करती हूँ,
जब न मिले चाहत का कोई बहाना,
तब पलकें बन्द करके आपको याद किया करती हूँ ।
दर्द के दरबार में फ़रियाद किया करती हूँ,
बेचैनियाँ समेट कर सारी जहाँ की,
तन्हाई में सिसकियों की आवाज आती है,
मैने सपनों मे चाहा है जिसे
मेरे इस दर्द को जमाने ने कितने नाम दे डाले,
खुद को समझाना चाहती हूँ,
चले थे उन राहों में पर जहाँ सिर्फ़ काँटे ही थे,