Monday, July 17, 2006

याद किया करती हूँ,..

दर्द के दरबार में फ़रियाद किया करती हूँ,
रात तन्हाई की आबाद किया करती हूँ,
जब न मिले चाहत का कोई बहाना,
तब पलकें बन्द करके आपको याद किया करती हूँ ।

शुक्रिया,..

बेचैनियाँ समेट कर सारी जहाँ की,
तुमने मेरे दामन में भर दी है जो,
शुक्रिया अदा करती हूँ मैं आपका,
आखिर जहाँ से कुछ तो ला कर दिया आपने ।

Thursday, July 13, 2006

याद,..

तन्हाई में सिसकियों की आवाज आती है,
महफिल में हिचकियों की आवाज आती है,
कुछ भी हो हर पल हर लम्हा
आप और सिर्फ़ आप की याद आती है ।

सपनों मे चाहा है जिसे,..

मैने सपनों मे चाहा है जिसे
अपनी हर दुआ में माँगा है जिसे,
हर तमन्ना उससे शुरु से होती है
हर चाहत उसपर खत्म होती है,
उसके बगैर जीना पडे तो कैसे जियेंगे हम,
मौत से बद्तर जिन्दगी होगी
किसको अपना कहेंगे हम ।

दर्द,..

मेरे इस दर्द को जमाने ने कितने नाम दे डाले,
हम बेवफ़ा बिल्कुल न थे,
फ़िर भी इतने इल्जाम दे डाले,
हमने तो सिर्फ़ उनसे की थी मोहब्बत
जिन्होंने इस दिल के टुकडे हजार कर डाले ।

आईने की तलाश,..

खुद को समझाना चाहती हूँ,
हर दर्द खुद से बतलाना चाहती हूँ
आज गर कोई पास होता मेरे,
तो ऐसा करने की चाहत ना होती
हर कागज पर इक आईना,
तलाशने की हसरत न होती ।

सपने ,...

चले थे उन राहों में पर जहाँ सिर्फ़ काँटे ही थे,
कोई अपना ना था सब बेगाने ही थे,
उनसे की प्यार की आस हमने,
जो कभी अपने न थे
उन्हे पूरा करना चाहा हमने
जो कभी सपने न थे ।

Wednesday, July 12, 2006

जुबानी मेरी,..

खामोशियों से पूछो कहानी मेरी,
तुम्हे पता चल जिन्दगानी मेरी,
मुझे खामोशी ने समझा,
और तन्हाईयों ने जाना है,
यही बतला देगें जुबानी मेरी ।