Monday, July 17, 2006

याद किया करती हूँ,..

दर्द के दरबार में फ़रियाद किया करती हूँ,
रात तन्हाई की आबाद किया करती हूँ,
जब न मिले चाहत का कोई बहाना,
तब पलकें बन्द करके आपको याद किया करती हूँ ।

2 comments:

  1. आपका स्वागत है आशा है आप ब्लाँग जगत को नई उचईयो पर ले जायेगी । आपकी चन्दिकाये बहुत ही अच्छी है

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  2. Hi...

    Great!! I'm a great fan pure hindi but can't write too much. nice blog to learn new thing..

    u hv a nice melancolly between thoughts & words..

    nice to come here..
    Roy

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