Monday, July 17, 2006

शुक्रिया,..

बेचैनियाँ समेट कर सारी जहाँ की,
तुमने मेरे दामन में भर दी है जो,
शुक्रिया अदा करती हूँ मैं आपका,
आखिर जहाँ से कुछ तो ला कर दिया आपने ।

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