Thursday, July 13, 2006

सपने ,...

चले थे उन राहों में पर जहाँ सिर्फ़ काँटे ही थे,
कोई अपना ना था सब बेगाने ही थे,
उनसे की प्यार की आस हमने,
जो कभी अपने न थे
उन्हे पूरा करना चाहा हमने
जो कभी सपने न थे ।

0 Comments:

Post a Comment

<< Home